अपने ही बुने जाल में फंसे प्रधानाध्यापक। विद्यालय की शिक्षिका के 2 वर्षों से नहीं आने का मामला तुल पकड़ा। हाल नोहटा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय का।


 पुष्पा गुप्ता की रिपोर्ट ;-

डेहरी।रोहतास
नौहटा प्रखंड के मेवरिया प्राथमिक विद्यालय मे पदस्थापित रही एक शिक्षिका के 2 वर्षों से विद्यालय नहीं आने के मामले में विद्यालय के प्रधानाध्यापक ही खुद अपने बुने जाल में फंसते जा रहे हैं। मामले में चार बार दिए अपने अलग-अलग बयान से जहां प्रधानाध्यापक मुश्किल में घिर गए हैं। वही विभागीय अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया में इसके लिए प्रधानाध्यापक को ही दोषी बताया है। जबकि जिस शिक्षिका अनसा देवी की प्रतिनियुक्ति रद्द कर उन्हें उनके मूल विद्यालय तीवरा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थापित किया गया है। इधर इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाया है तथा अनुमंडल लोक शिकायत का दरवाजा खटखटाया है। अब अपनी गर्दन फस्ते देख अधिकारी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। बताया जाता है कि उग्रवाद प्रभावित नौहटा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय नेवरिया में कुल 93 छात्र हैं। उक्त विद्यालय में प्रधानाध्यापक के अलावे तिउरा प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका अनसा देवी की प्रतिनियुक्ति हुई थी। किंतु 4 माह पूर्व ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर शिक्षा पदाधिकारी से शिकायत की। प्रतिनियुक्ति के बाद से अब तक अनसा देवी शिक्षिका विद्यालय नहीं आती है और उनके परिवार के सदस्य विद्यालय पणजी को अपने घर ले जाकर उपस्थिति बनवाते हैं। विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं से लेकर अभिभावकों के आरोप के बाद कारवाई के बदले बी ई ओ ने मार्च में उक्त शिक्षिका के प्रतिनियुक्ति रद्द कर उसे उसके मूल विद्यालय में भेज दिया। यही नहीं 17 मार्च को विद्यालय के प्रधानाध्यापक बुद्धि नारायण राम ने भी डी ओ को लिखे। पत्र में आरोप लगाया कि सितंबर 2018 में उनके द्वारा विद्यालय में प्रधानाध्यापक पेपर पर पदस्थापित होने के बाद शिक्षिका विद्यालय नहीं आई और परिवार के सदस्य महीने में 1 दिन अपने घर रजिस्टर ले जाकर उपस्थिति बनवाते थे। हालांकि इस मामले में अधिकारियों ने कोरोना का हवाला देकर करवाई के बदले चुप्पी साधी। जब मामला तूल पकड़ा तो प्रधानाध्यापक ने अपने ही द्वारा लिखित आरोप को गलत बताते हुए डीओ को लिखित दिया कि अनसा देवी शिक्षिका प्रत्येक दिन विद्यालय आकर उपस्थिति बनाती थी। कारवाई नहीं होने पर राणा प्रताप सिंह ग्रामीणों ने अनुमंडल लोक शिकायत पदाधिकारी कार्यालय से परिवाद दायर किया। लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने इस मामले में डीओ को नोटिस जारी किया। सवाल यह है कि प्रधानाध्यापक ने चार बार अलग-अलग अपना बयान क्यों बदला और आरोप के बावजूद डीओ मामले पर चुप्पी क्यों साधी? कई शिक्षकों ने दबी जुबान में बताया कि नौहट्टा प्रखंड में कई अवधि विद्यालय हैं। जहां के शिक्षक शिक्षिका स्कूल जाने के बजाए अधिकारियों की मिलीभगत से वेतन उठाते हैं। हालांकि अनसा देवी का आरोप है कि राजनीतिक साजिश के तहत उन पर गलत तरीके से आरोप लगाया जा रहा है। वह लगातार विद्यालय में आती रही हैं। प्रधानाध्यापक द्वारा बार-बार लिखित बयान बदलने से उन्हें कोई मतलब नहीं है। इधर बी ई ओ का कहना है कि जिस प्रकार प्रधानाध्यापक के बयान बदलने व घालमेल की बात सामने आ रही है ऐसे में जांच कर प्रधानाध्यापक और शिक्षिका दोनों पर कारवाई की जाएगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि नौहटा प्रखंड से लगातार शिकायत मिलती है और नेवरिया प्राथमिक विद्यालय मामले में प्रथम विष्टेया में प्रधानाध्यापक दोषी हैं। शिक्षिका के विद्यालय आए बिना वेतन निकालने की पुष्टि होने के बाद वेतन की राशि रिकवरी की जाएगी तथा अन्य कारवाई भी की जाएगी। मामले का खुलासा होने के बाद प्रधानाध्यापक बी ई ओ व शिक्षिका अपने-अपने बचाव में जुट गए हैं।