**सीनियर डीपीओ अजीत कुमार ने खुद अपने हाथों से बांटे श्रमिकों को निशुल्क भोजन।
** त्रासदी के इस दौर में डीडीयू रेल मंडल का बेहतरीन पहल।
गौतम कुमार शर्मा
डेहरी /रोहतास
कोरोनावायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए देश में चल रहे लॉकडाउन के दौरान त्राहिमाम करते प्रवासी मजदूरों का अपने - अपने घरों में लगातार पलायन जारी है। हर श्रमिक अपने गांव जाने के लिए आतुर है। जो जहाँ है और जैसे है, बस घर पहुंचना चाहता है।ऐसे लाचार और बेबस श्रमिक बगैर खाना खाए भी हजारों किलोमीटर की सफर में भूखे पेट ही निकल जाते हैं।ऐसे विकट स्थिति में पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल का प्रतिदिन दस हजार श्रमिकों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराने का फैसला श्रमिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। ऐसे ही जरूरमंद श्रमिकों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के कार्मिक विभाग ने एक प्रशंसनीय प्रयास शुरू किया है। जिसके अंतर्गत सासाराम, डेहरी, औरंगाबाद, गया सहित मंडल से होकर गुजरने वाली सभी श्रमिक ट्रेनों में सफर कर रहे श्रमिकों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराई जाएगी।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के रेल प्रबंधक पंकज सक्सेना के निर्देश पर अपनी जान की परवाह किए बगैर भारतीय रेल कार्मिक सेवा 2010 बैच के वरिष्ठ अॉफिसर व डीडीयू रेल मंडल के वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी अजीत कुमार ने खुद ही मोर्चा संभाल ली। और स्कॉउट एवं गाईड के नौजवानों के साथ मिलकर 10000 भोजन के पैकेट श्रमिक ट्रेनों में सफर कर रहे श्रमिकों के बीच खुद अपने हाथों से बांट कर इस बेहतरीन सेवा की शुरुआत की। ट्रेनों में सफर कर रहे श्रमिक भी अच्छे व्यंजन और रेल अधिकारी के इस अपनत्व भरी सेवाभाव से काफी प्रफुल्लित नजर आ रहे थे । जब कोरोनावायरस के घातक संक्रमण के डर से हर कोई घर में महफूज महसूस कर रहा है ऐसे में सीनियर डीपीओ अजीत कुमार के इस साहसिक कदम की चौतरफा तारीफ हो रही है।रेलकर्मियों व अधिकारियों के बीच इनकी चर्चा कोरोना योद्धा के तौर पर हो रही है। सीनियर डीपीओ ने यात्रियों से लॉकडाउन के नियमों का शत प्रतिशत पालन की अपील करते हुए उन्हें समझाया कि अपने गंतव्य स्टेशनों पर उतारने के बाद राज्य सरकारों की गाइडलाइंस का ध्यान रखें तथा कोरोना को हराने में सरकार की मदद करें।
कल देश के कोने-कोने से श्रमिकों को लेकर आने वाली 30 श्रमिक ट्रेनों का ठहराव पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल जंक्शन पर होते ही चौबीसों घंटे तकरीबन दस हजार श्रमिकों के बीच निशुल्क भोजन की पैकेट का वितरण होते रहा। जो कि निरंतर लॉकडाउन के अवधि तक चलता रहेगा। इस अभियान में रेलवे के कार्मिक विभाग ने 100 कुशल कारीगरों को भोजन बनाने के लिए लगाया गया। जो खाना बनाने से लेकर पैकेट तैयार करने में लगे हैं।
